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धर्म

मंगला गौरी व्रत 2026: सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का अद्भुत संयोग, जानें पूजा विधि और नियम

Janadesh
August 11, 2026 2 Mins Read

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है। इस बार 11 अगस्त 2026 का दिन श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है, क्योंकि आज सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत के साथ-साथ सावन शिवरात्रि का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। इस दुर्लभ संयोग में शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करने का फल कई गुना बढ़ जाता है।


मंगला गौरी व्रत का महत्व

मंगला गौरी का व्रत मुख्य रूप से माता पार्वती को समर्पित है।

  • सुहागिन महिलाएं: अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुखद गृहस्थ जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • अविवाहित कन्याएं: मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए मां गौरी की पूजा व व्रत करती हैं।

पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

  1. संकल्प और स्थापना: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान को साफ करके माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  2. वस्त्र एवं श्रृंगार: मां गौरी को लाल या पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद सिंदूर, अक्षत (चावल), फूल, फल और मिष्ठान चढ़ाएं।
  3. सुहाग सामग्री: सुहागिन महिलाएं मां गौरी को चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर और चुनरी जैसी सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें।
  4. प्रार्थना व कथा: परिवार में सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करें। अंत में मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें और आरती उतारें।

विशेष नियम: मां गौरी को चढ़ाई गई सुहाग सामग्री को पूजा के बाद खुद प्रसाद स्वरूप धारण करें या किसी अन्य सुहागिन महिला को भेंट कर दें। इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।


शिवरात्रि पर जलाभिषेक

सावन शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने का विशेष विधान है:

  • शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित करें।
  • पूजन के दौरान लगातार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।

पूजा का फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां गौरी वैवाहिक जीवन में मिठास और सौभाग्य प्रदान करती हैं, जबकि भगवान शिव की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और शांति व सकारात्मकता का संचार होता है।

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