नेपाल-चीन सीमा पर स्थित लंगटांग राष्ट्रीय उद्यान के समीप ग्लेशियर ढहने से भीषण तबाही मच गई है। इस दुखद प्राकृतिक आपदा में अब तक 950 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,000 से भी ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
ग्लेशियर टूटने के बाद त्रिशूली, भोटेकोशी और ल्हेंदे खोला नदियों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी विनाश मचाया, जिससे कई गांव, सड़कें और बुनियादी ढांचे जलमग्न हो गए। इस जलप्रलय की वजह से रसुवा और नुवाकोट जिलों में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में 500 से अधिक मजदूर फंस गए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इस घटना से 5.2 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था। इस आपदा में भारत समेत अन्य देशों के कई पर्यटक और तीर्थयात्री भी प्रभावित हुए हैं। फिलहाल हेलीकॉप्टर और राहत एजेंसियां दुर्गम क्षेत्रों में बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन भारी मलबे के कारण अभियानों में कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।