गणेशोत्सव के पावन पर्व पर विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की पूजा के साथ-साथ माता गौरी (पार्वती जी) के पूजन का भी विशेष शास्त्रोक्त विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी के आगमन के तीसरे दिन माता गौरी का आगमन होता है, जिसे महाराष्ट्रीय समाज द्वारा ज्येष्ठागौरी व्रत के रूप में अत्यंत श्रद्धा और निष्ठा के साथ मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से नक्षत्रों की गणना पर आधारित होता है; इसमें पहले दिन अनुराधा नक्षत्र में माता ज्येष्ठागौरी (श्री महालक्ष्मी) की घर-घर स्थापना की जाती है, दूसरे दिन ज्येष्ठा नक्षत्र में महापूजा कर विशेष भोग लगाया जाता है, और तीसरे दिन मूल नक्षत्र में उन्हें विधि-विधान से विदाई दी जाती है।

इस व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, एक अत्यंत निर्धन पुरोहित अपने बच्चों की इच्छा पर गौरी स्थापना के लिए निकला, जहाँ उसे रास्ते में स्वयं माता ज्येष्ठागौरी एक वृद्ध सुहागिन स्त्री के रूप में मिलीं। पुरोहित की व्यथा सुनकर माता उसके घर पधारीं, जिससे उनका खाली अन्न का बर्तन तुरंत अनाज से भर गया। माता के कहे अनुसार पुरोहित की पत्नी ने उन्हें पहले दिन आंबील (नाचणी या ज्वार और छाछ का व्यंजन), दूसरे दिन घावण-घाटले और तीसरे दिन खीर-पूरी का नैवेद्य अर्पित किया। माता के आशीर्वाद और बताए गए उपायों से पुरोहित का घर धन-धान्य, तिजोरियों और पशुधन से समृद्ध हो गया और परिवार को अखंड सुख-समृद्धि प्राप्त हुई
परंपरा के अनुसार, भाद्रपद माह में जलाशयों के किनारे से दो छोटे पत्थर लाकर, उन्हें गर्म पानी से धोकर ‘ज्येष्ठागौरी’ और ‘कनिष्ठागौरी’ के रूप में स्थापित किया जाता है, जबकि कई स्थानों पर पीतल या मिट्टी के मुखौटों तथा विशेष मूर्तियों का उपयोग भी होता है। इस दौरान सुहागिन स्त्रियों को हल्दी-कुमकुम लगाकर, साड़ी, चोली, चावल, सुपारी और चूड़ियाँ देकर उनकी गोद भराई की जाती है और भोजन कराया जाता है। उत्सव के दिनों में घरों में आकर्षक सजावट और रोशनी की जाती है तथा परंपरा के अनुसार 16 प्रकार की सब्जियां और 16 प्रकार के मीठे पकवान बनाने का विधान है, जो वर्तमान में कई जगहों पर 5 प्रकार तक सीमित हो गया है

सी. एस. ई. बी. कॉलोनी कोरबा पूर्व में श्रीमती मालती जोशी के निवास पर ज्येष्ठागौरी व्रत के अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान परिवारजनों एवं महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता गौरी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की।